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मुख्याध्ष्ठिाता का संदेश

गुरुकुल कांगडी की स्थापना लगभग एक शताब्दी पूर्व देव दयानन्द के अनन्य भक्त और अनुयायी महान् स्वतन्त्राता संग्राम सेनानी, शु(ि आन्दोलन के प्रवर्तक, अमर हुतात्मा स्वामी श्र(ानन्द ;महात्मा मुंशीरामद्ध ने आर्य प्रतिनिध् िसभा पंजाब के सहयोग से हरिद्वार से 5 मील की दूरी पर गंगा के पूर्व तट पर 1902 में की थी। इस संस्था का उद्देश्य स्थापना काल से ही पवित्रा एवं पावन तथा शांत वातावरण में प्राचीन वैदिक संस्कृत साहित्य और विभिन्न आध्ुनिक विज्ञान विषयों की उच्च शिक्षा देकर ब्रह्मचारी ;छात्रोंद्ध को चरित्रावान, बु(िमान, विद्वान, बलवान और अनुशासित नागरिक बनाना हैं।

सन् 1924 में भयंकर बाढ के पफलस्वरुप पुण्य भूमि के भवनों के क्षतिग्रस्त होने के कारण यह संस्था हरिद्वार के निकट दक्षिण दिशा में गंगनहर के किनारे ;कनखल ज्वालापुर दिल्ली बाईपास रोड़ परद्ध एक विस्तारित भू-भाग में स्थापित हो गयी, जो आज वर्तमान में एक विशाल एवं विख्यात संस्था के रुप में संपूर्ण विश्व में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के रुप में प्रसि( है। गुरुकुल से शिक्षित एवं संस्कारित ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचारणियां स्नातक होकर देश एवं विदेश में वैदिक संस्कृति, भारतीय सभ्यता एवं आर्य सि(ान्तों की ध्वजा को पफहराते हुए भारत का मान-सम्मान बढा रहे हैं। गुरुकुल के स्नातक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सपफल होकर अपने गौरवमयी व्यक्तित्व से नव कीर्तिमानों को स्थापित कर रहे हैं। मुझे यह कहते हुए आज अत्यन्त हर्ष की अनुभूति हो रही है कि गुरुकुल कांगडी हरिद्वार का जो वर्तमान भवन है उनके सूत्राधार कन्या गुरुकुल देहरादून के संस्थापक आचार्य रामदेव जी ही थे। जिनके उत्तम चितंन के कारण गुरुकुल कांगडी हरिद्वार एवं कन्या गुरुकुल देहरादून आज सम्पूर्ण विश्व में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते है तथा अपने कार्यो से देश के गौरव को भी बढ़ा रहें है।

स्थापना काल से ही गुरुकुल कांगडी विद्यालय हरिद्वार 116 वर्षों से शिक्षण का अद्वितीय विश्व प्रसि( शिक्षण केन्द्र रहा है गुरुकुल के स्नातक सम्पूर्ण विश्व में अपनी योग्यता एवं संस्कारो से गुरुकुल के यश की अभिवृ(ि अनवरत रुप से कर रहे हैं।

गुरुकुल में छात्रों को आध्ुनिक विषयों के शिक्षण के साथ-साथ योग एवं संस्कार आदि में दीक्षित कर उत्तम चरित्रा के संस्कारों से भी मंडित कर संस्कारवान नागरिक बनाया जाता है। गुरुकुलीय वातावरण प्राकृतिक रुप से उत्तम एवं शान्त है जहाँ छात्रों के पठन-पाठन में मन केन्द्रित रहता है।

गुरुकुल में वर्तमान में कक्षा प्रथम से अष्ट्म तक एन0सी0ई0आर0टी0 का पाठ्यक्रम संचालित है। कक्षा नवम् से द्वादश तक केन्द्रिय माध्यमिक शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली द्वारा निर्धरित पाठ्यक्रम संचालित होता है। गुरुकुलीय वातावरण शिक्षण के साथ-साथ छात्रों को मानवीय गुणों, उत्तम संस्कारों, देशभक्ति भावना, मातृ-पितृ भक्त एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवधर््न का भी अवसर प्रदान करता है। पवित्रा एवं योग्य आचार्यो के संरक्षण में बालक का प्राचीन एवं आध्ुनिक प(ति से निर्माण करना ही गुरुकुल का परम लक्ष्य है।

(डा0 दीनानाथ शर्मा)
मुख्याधिष्ठाता/अधिकृत प्रतिनिधि
ओमप्रकाश आर्य प्रधान, आर्य विद्या सभा
गुरुकुल कांगडी, हरिद्वार

 
 

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